रस्म-ए-वफ़ा निभाना तो गैरत की बात है

                                                                                                                          – डॉ. नुज़्हत अंजुम

 

                                                                      

rasm e wafa nibhana tau ghairat ki baat hai
wo mujhko bhool jayain, ye hairat ki baat hai

sab mujhko chahte hain ye shohrat ki baat hai
mai usko chahti hoo’n ye qismat ki baat hai

izhaar e ishq karr hi diya mujh se aap ne
ye bhi janab aap ki himmat ki baat hai

taareef karr rahe hain sabhi aaj kal meri
ismey koi zaroor siasat ki baat hai

rakhta hai yunhee yaad kisi ko koi kaha’n
ye to, bus apni apni zaroorat ki baat hai

Wo jiss ko chahey Apne Karam se nawaz de
ye tau Khuda ki bandey se nisbat ki baat hai

sauda kisi se mainey ana ka nahee’n kiya
NUZHAT ye mere wastey izzat ki baat hai

रस्म-ए-वफ़ा निभाना तो गैरत की बात है
वो मुझको भूल जाएँ, ये हैरत की बात है

सब मुझको चाहते हैं ये शोहरत की बात है
में उसको चाहती हूँ ये क़िस्मत की बात है

इज़हार-ए-इश्क़ कर ही दिया मुझ से आप ने
ये भी जनाब आप की हिम्मत की बात है

तारीफ़ कर रहे हैं सभी आज कल मेरी
इसमे कोई ज़रूर सियासत की बात है

रखता है यूँ ही याद किसी को कोई कहाँ
ये तो, बस अपनी अपनी ज़रूरत की बात है

वो जिसस को चाहे अपने करम से नवाज़ दे
ये तो खुदा की बंदे से निस्बत की बात है

सौदा किसी से मैने अनाका नहीं किया
नुज़्हत ये मेरे वास्ते इज़्ज़त की बात है

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