Total Visit _
 

क़र्ज़ गम का चुकाना पड़ा है

                                                                                                                          – डॉ. नुज़्हत अंजुम

 

Qarz gum ka chukana pada hai
ro ke bhi muskurana pada hai

Sach ko sach keh diya tha isi par
mere peechay zamana pada hai

Ek Khuda ke na aagay jhukey to,
dar-ba-dar sar jhukana pada hai

Tujh ko apna banane ki khatir
sab ko apna banana parha hai

Kya batayein ki kin mushkilon mein
Zindagi ko nibhana pada hai

Sang dil hain jo mashoor “NUZHAT”
Sher unko sunana pada hai
क़र्ज़ गम का चुकाना पड़ा है
रो के भी मुस्कुराना पड़ा है

सच को सच कह दिया था इसी पर
मेरे पीछे ज़माना पड़ा है

एक खुदा के ना आगे झुके तो,
दरबदार सर झुकना पड़ा है

तुझ को अपना बनाने की खातिर
सब को अपना बनाना पड़ा है

क्या बताएँ की किन मुश्किलों में
ज़िंदगी को निभाना पड़ा है

संग दिल हैं जो है मशहूर नुज़्हत
शेर उनको सुनना पड़ा है
 
 

Back to the Nuzhat Anjum Page

 Posted by at 10:58 PM
Optimization WordPress Plugins & Solutions by W3 EDGE