(Last Updated On: December 30, 2018)

 

बिहार का स्वरूप

बिहार की जनता करे पूकार,
बिहार का हो पुनरोद्धार।
जो था कभी शिक्षा संस्कृति का गढ़,
आज वहीं जनता अनपढ़।
                               चहु ओर था ज्ञान ही ज्ञान,
                               आज केवल पसरा अज्ञान।
                               जहाँ जन्में चाणक्य और बुद्ध,
                               वातावरण भी था स्वच्छ और शुद्ध।
आज बिहार का खस्ता हाल,
जनता भी बिल्कुल बेहाल।
नेता उल्लू सीधा करते,
गरीब जनता भूखे मरते।
                               नेताओं की गंदी चाल,
                               कर दिया बिहार को कंगाल।
                               जो कभी था सबसे आगे,
                               जनता आज वहीं से भागे।

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